Monday, 15 September 2025

#जिसकी_लाठी_उसकी_भैंस




आज की दुनिया “जिसकी लाठी उसकी भैंस” के सिद्धांत पर चल रही है। चाहे अमेरिका हो या चीन, हर शक्ति केंद्र अपने-अपने स्वार्थों और जटिल समूहों के इर्द-गिर्द काम कर रहा है। वैश्विक राजनीति में अब पीठ पीछे वार (backbiting) और दोहरे मानदंड सामान्य हो चुके हैं।

ऐसे समय में भारत के लिए तीन चीज़ें अत्यंत आवश्यक हैं—

1️⃣ मजबूत भारत (Strong and self reliant India)– रक्षा, प्रौद्योगिकी, ऊर्जा और आत्मनिर्भर उत्पादन में सामर्थ्य।

2️⃣ स्थिर भारत (Stable Bharat)– राजनैतिक और आर्थिक स्थिरता ताकि निवेश और विश्वास दोनों लंबे समय तक टिकें। India needs to continue its march with centuries of Patience practice. This one thing single out India as natural resting ground for Democracy

3️⃣ स्मार्ट भारत (Smart Bharat)– शिक्षा, नवाचार और डिजिटल सशक्तिकरण से ऐसा दृष्टिकोण जो आने वाली पीढ़ियों को सक्षम बनाए। India is continuously exploring innovations in all areas of life and governance.

अगर हम इन तीन स्तंभों पर आगे बढ़ते हैं, तो भारत सिर्फ़ “balancing power” नहीं रहेगा, बल्कि rule-shaper राष्ट्र बनेगा—जो विश्व व्यवस्था को दिशा देगा, न कि सिर्फ़ उसका अनुसरण करेगा।

स्वदेश की पुकार – गाँव से जुड़े शिक्षा और संसार

स्वदेश की पुकार – गाँव से जुड़े शिक्षा और संसार
भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है। यदि हम अपने गाँवों का आकर्षण और जीवनशैली खो देंगे तो जल्द ही भारत अपनी पहचान और सनातन की मधुर जीवन-पद्धति खो देगा। इसलिए हम, एक प्रारंभिक कदम के रूप में, शिक्षा विभागों और विद्यालयों से यह प्रस्ताव और अपील रखते हैं कि—

1. गाँव से जुड़े प्रोजेक्ट अनिवार्य रूप से वर्ष में दो बार
- प्रत्येक विद्यार्थी (कक्षा 1 से लेकर पीएचडी तक, सभी विषयों और संस्थानों – विद्यालय, कॉलेज, IIT, IIM सहित) को हर छह माह में गाँव से जुड़ा एक प्रोजेक्ट करना अनिवार्य किया जाए।
- ये प्रोजेक्ट प्रकृति, कृषि, संस्कृति, इतिहास, लोककला, स्वास्थ्य या उद्यमिता जैसे विषयों से संबंधित हो सकते हैं।
- इससे विद्यार्थियों को ग्रामीण जीवन की गहराई से समझ मिलेगी और गाँवों में भी नई सोच व नवाचार पहुँचेगा।

2. परीक्षाओं और संगोष्ठियों का आयोजन गाँवों में
- जैसे चुनाव गाँवों में सफलतापूर्वक आयोजित होते हैं, वैसे ही परीक्षाएँ और शैक्षणिक कार्यक्रम भी गाँवों में आयोजित किए जा सकते हैं।
- प्रारंभ में छोटे स्तर पर विद्यालय व कॉलेज परीक्षाएँ, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ और संगोष्ठियाँ गाँव के सामुदायिक भवनों या पंचायत भवनों में आयोजित हों।
- इससे गाँवों की शैक्षणिक बुनियाद मजबूत होगी और ग्रामीण युवाओं में आत्मविश्वास व गौरव का भाव बढ़ेगा।

3. निजी विद्यालयों का वार्षिक कार्यक्रम गाँवों में
- सभी निजी विद्यालयों को अपने वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम पास के किसी गाँव में आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- इन कार्यक्रमों में ग्रामीण जनता को विशेष अतिथि और सहभागी बनाया जाए।
- इससे गाँवों की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा (स्थानीय कलाकारों, विक्रेताओं व सेवाओं को अवसर मिलेगा) और लोक-संस्कृति का संरक्षण व प्रसार भी होगा।

👉 आइए, इन दो विचारों को लेकर हम एक नई शुरुआत करें—
- जिससे शिक्षा गाँवों तक पहुँचे,
- गाँवों की धड़कन फिर से भारत के दिल में गूँजे,
- और आने वाली पीढ़ियाँ अपने सनातन मूल्यों के साथ आधुनिकता का संगम करें।



Proposal for Uplifting Villages through Education-Linked Initiatives

Proposal for Uplifting Villages through Education-Linked Initiatives
1. Village-Linked Student Projects (Twice a Year, All Levels)
Scope: From Class 1 to PhD, across all streams.

Examples of Projects:
Primary (1–5): “My Village Story,” seed plantation, documenting folk songs, sketching village life.

Middle School (6–8): Surveying village resources, local water management, oral history with elders.

High School (9–12): Micro research on farming techniques, village entrepreneurship models, health surveys.

College & University: Tech-enabled solutions (apps, low-cost machines), startup models for rural crafts, social impact research.

Impact:
Students gain practical exposure.
Villages get documentation, innovation, and recognition.
Creates emotional connect between urban youth and rural roots.

2. Examinations & Seminars Conducted in Villages

Model: If elections can happen in villages, so can educational events.

Implementation:
Small-scale exams & debates/seminars hosted in Panchayat Bhavans, schools, or under community halls.

Universities can set “Village Test Centres” for specific exams.

Seminars on local economy, ecology, folk culture with joint participation of villagers and students.

Impact:
Improves rural infrastructure (as facilities improve for exams).

Village youth feel included in the academic ecosystem.
A sense of prestige develops when villagers see their place as a learning hub.

3. Private Schools’ Annual Programs in Villages
Idea: Private schools should hold annual cultural functions in villages.

Format:
Stage setup in village grounds. Students showcase plays, music, dance based on village themes.
Invite villagers as chief guests and audience.

Impact:
Boosts local economy (transport,catering, craft sales).

Revives folk traditions by integrating them into performances.

Enhances mutual respect between urban & rural communities.

स्वदेश की पुकार – गाँव से जुड़े शिक्षा और संसार


भारत की आत्मा उसके गाँवों में बसती है। यदि हम अपने गाँवों का आकर्षण और जीवनशैली खो देंगे तो जल्द ही भारत अपनी पहचान और सनातन की मधुर जीवन-पद्धति खो देगा। इसलिए हम, एक प्रारंभिक कदम के रूप में, शिक्षा विभागों और विद्यालयों से यह प्रस्ताव और अपील रखते हैं कि—

1. गाँव से जुड़े प्रोजेक्ट अनिवार्य रूप से वर्ष में दो बार
- प्रत्येक विद्यार्थी (कक्षा 1 से लेकर पीएचडी तक, सभी विषयों और संस्थानों – विद्यालय, कॉलेज, IIT, IIM सहित) को हर छह माह में गाँव से जुड़ा एक प्रोजेक्ट करना अनिवार्य किया जाए।
- ये प्रोजेक्ट प्रकृति, कृषि, संस्कृति, इतिहास, लोककला, स्वास्थ्य या उद्यमिता जैसे विषयों से संबंधित हो सकते हैं।
- इससे विद्यार्थियों को ग्रामीण जीवन की गहराई से समझ मिलेगी और गाँवों में भी नई सोच व नवाचार पहुँचेगा।

2. परीक्षाओं और संगोष्ठियों का आयोजन गाँवों में
- जैसे चुनाव गाँवों में सफलतापूर्वक आयोजित होते हैं, वैसे ही परीक्षाएँ और शैक्षणिक कार्यक्रम भी गाँवों में आयोजित किए जा सकते हैं।
- प्रारंभ में छोटे स्तर पर विद्यालय व कॉलेज परीक्षाएँ, वाद-विवाद प्रतियोगिताएँ और संगोष्ठियाँ गाँव के सामुदायिक भवनों या पंचायत भवनों में आयोजित हों।
- इससे गाँवों की शैक्षणिक बुनियाद मजबूत होगी और ग्रामीण युवाओं में आत्मविश्वास व गौरव का भाव बढ़ेगा।

3. निजी विद्यालयों का वार्षिक कार्यक्रम गाँवों में
- सभी निजी विद्यालयों को अपने वार्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम पास के किसी गाँव में आयोजित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए।
- इन कार्यक्रमों में ग्रामीण जनता को विशेष अतिथि और सहभागी बनाया जाए।
- इससे गाँवों की अर्थव्यवस्था को लाभ होगा (स्थानीय कलाकारों, विक्रेताओं व सेवाओं को अवसर मिलेगा) और लोक-संस्कृति का संरक्षण व प्रसार भी होगा।

👉 आइए, इन दो विचारों को लेकर हम एक नई शुरुआत करें—
- जिससे शिक्षा गाँवों तक पहुँचे,
- गाँवों की धड़कन फिर से भारत के दिल में गूँजे,
- और आने वाली पीढ़ियाँ अपने सनातन मूल्यों के साथ आधुनिकता का संगम करें।



- Akp

Tuesday, 2 September 2025

Vision for Vishwa Guru Bharat: An Idea to open 2.68 lakh unique Gram Universities

             "ॐ श्री गणेशाय नमः" 

Developing Gram Panchayat as Centre of Learning and Reflections


Vision for Vishwa Guru Bharat

Background

Indian villages have always been the mothers of civilization—repositories of skills, traditions, and wisdom. Villages were historically self-reliant, thriving on skill-sharing and collective learning. Today, as India aspires to reclaim its place as Vishwa Guru, the Gram Panchayat must evolve beyond administrative governance to become the nucleus of knowledge, skills, and inner growth.

Vision

To transform every Gram Panchayat (GP) into a Centre of Excellence & Reflection, integrating modern science and technology with India’s timeless spiritual, cultural, and self-reliant ethos.

Key Pillars of the Model

  1. Re-Imagined Identity

    • Each Gram Panchayat is to be identified and reimagined as a self sufficient unit of this vast civilisation and nation. The way swachh Bharat abhiyan has made our villages clean , the same way we need the river of "Gyan Ganga" enrich our villages with knowledge and skill through constructive discourse and projects.  To start with we need to rename them to reflect their dual role governance + excellence.
    • Example:  Mukundpur Gram Panchayat of Bihar. We can select one Mahapurush from the respective GPs or Famous temples and rename as Mukundpur Gram Panchayat & Shri Har Narayan Sinha Gram Vishwavidyalay 
    • Alternatively: Mukundpur Gram Panchayat & PMUE – Prime Minister Gram University or simply  Mukundpur Gram Panchayat and Gram University 
  2. Networked Learning Hubs

    • Each centre will be digitally and academically connected with premier institutions: ISRO, DRDO, BARC, IITs, IIMs, AIIMS, and global universities.
    • Students and villagers can access lectures, training modules, and mentorship directly from these institutions.
  3. Knowledge Exchange Activities

    • Regular seminars, competitions, and reflection circles among students, teachers, farmers, artisans, women, and youth.
    • Guidance from apex institutions to make discussions relevant to local needs (e.g., agriculture, renewable energy, entrepreneurship, space science, AI).
    • All such discussions and seminars to be documented.
    • Each GU to publish their weekly or fortnightly or monthly magazine in digital and physical mode. 
    • Each participants to be awarded with points and certifications and digital repositories of such record to be created. 
  4. Infrastructure Essentials

    • Library & Digital Knowledge Bank (local + global content, multilingual).
    • Laboratories & Skill Labs (science, agriculture, IT, handicrafts, robotics, green energy).
    • Meditation & Yoga Hall (for inner reflection, health, and well-being).
    • Seminar Halls & Open Amphitheatre (to encourage dialogue and cultural expression).
    • To make the above arrangements we can bring all the school building, Gram Panchayat building and take on lease " Duars and Dalan" to involve the villagers under the overall administrative control of the proposed GU.
    • Each such GU is proposed to be headed by retired and well qualified person, duly selected through proper mechanism and should have a rank of VC. The VC and his team must be staying in the area. The entire extra curricular activities, skill-sharing and sports to be held through the proposed GU. The VC may be selected for a period of 3 years or 5 years.
    • Each GU to be mentored by one UGC recognised university.
  5. Scale & Impact

    • With ~2.68 lakh Gram Panchayats, India can create the world’s largest decentralized open university in one move.
    • Knowledge will not only flow top-down (from institutions to villages) but also bottom-up (from indigenous skills and wisdom to research bodies).
  6. Holistic Learning Spectrum

    • Science & Technology – space, AI, energy, health, agriculture.
    • Arts & Languages – literature, theatre, folk, fine arts.
    • Yoga, Meditation & Spirituality – discovering "Who am I?" alongside "What can I do?".
    • Business & Entrepreneurship – local startups, self-reliance, financial literacy.
    • Sports & Physical Development – nurturing talent at grassroots.

Expected Outcomes

  • Knowledge democracy: Every citizen as a student, every village as a university.
  • Revival of India’s self-reliant ecosystem through skill enrichment.
  • Bridging the rural-urban divide with equal access to top-quality learning.
  • Strengthened sense of identity, rooted in both modern innovation and ancient wisdom.
  • Empowered youth and women leading local transformation.
With the implementation of this we see an overwhelming change in atmosphere of villages. We may and will see talents coming out from villages in large numbers.

With facilities reaching out to each corner of the nation and with this schemes knowledge and skill taking centre stage in respect and recognition and personal growth and fulfillment we may again start finding our villages as Centre of Excellence. 


Wednesday, 27 August 2025

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्ष !

संघ के 100 साल youtube.com 


संघ सौ वर्षों से चला आ रहा एक नारा है,

संघ भारत माता के आँचल का तारा है। 🌟

संघ के चलने का प्रयोजन भारत है,

संघ का सपना — "विश्वगुरु हो भारत" है। 🇮🇳


संघ श्रद्धेय बाल गंगाधर तिलक के सपनों की अभिलाषा है,
संघ गुरुजी गोलवलकर के चिंतन का उजियारा है। 🔥
संघ वीर सावरकर के तेजस्वी उपदेशों की माला है,
संघ डॉ. हेडगेवार के तप और त्याग की ज्वाला है। 🙏

संघ बारह सौ मासों के बलिदानों की गाथा है,
संघ असंख्य स्वयंसेवकों के द्वारा आपदा में पड़े जीवन का सहारा है। 💪

संघ आशा है एक सशक्त, सुंदर,निर्भीक भारत का!

संघ भरोसा है भारत के नूतन सृजन का 

संघ अटल है — माँ भारती का सच्चा सेवक है,
संघ आडवाणी-मोदी जैसे नेताओं का सुपोषक है। 🌿संघ  माली  है राष्ट्र निर्माताओं के उपवन का !

विद्यालय है तप त्याग और अनुशासन का  !!

संघ इतिहास की गलतियों से उपजी एक सीख है,
बाबर जैसों की बर्बरता पर जाग्रत खीज है। ⚔️
संघ वीर शिवाजी, महाराणा, पृथ्वीराज के घावों का मरहम है,
संघ कोटि-कोटि स्वयंसेवकों के गौरवशाली राष्ट्र का परचम है। 🚩

संघ स्वामी विवेकानंद और दयानंद का दिया हुआ प्रकाश है,
संघ कुरुक्षेत्र में श्रीकृष्ण का अमर उपदेश है। ✨
संघ हनुमान जी का रावण को दिया साहसिक संदेश है,
संघ है लक्ष्मण-रेखा, राम प्रताप और अंगद का अडिग शरीर है। 🛡️


संघ है तो भारत को विश्वास है,

युगपुरुषों से इसकी गोद आबाद है।
संघ है तो भारत को सच्चा नेतृत्व मिलेगा,
संघ है तो पुलवामा का उत्तर — ऑपरेशन सिंदूर मिलेगा। 🕊️

संघ है तो भारत के हित की बात होगी,
संघ है तो सबके हित की विचारधारा होगी।
संघ है तो समाज का निर्माण मिलेगा,
संघ है तो एक दिन फिर भारत को
"सोने की चिड़िया" का नाम मिलेगा। 🕊️✨

संघ इस युग में सनातन के वृक्ष की जड़ों में पड़ी खाद है,
संघ है तो राष्ट्रनिर्माण एक प्रण, निष्काम कर्म और तपसाध है।

संघ है राष्ट्र का नवचेतन, संस्कृति का आधार,

संघ है माँ भारती की सेवा का पावन द्वार। 🌺


Tuesday, 26 August 2025

एक मित्र का अपनी पत्नी से निवेदन

Disclaimer
डर-डर कर कह रहा हूं अपने दोस्तों की आपबीती 😅
इसे मत मान लेना हमारे विचारों की स्थिति !! 🙏

मेरे दोस्तों के अफ़साने....

ऐसा लगता है, वो प्यार नहीं शासन करती है 💂‍♀️
मुझे हर बात पर टोकती है 😖
रोज़ सुबह मच्छरों जैसे भुनभुनाती!! 🦟
रात होते होते युद्ध-भेदी शंख है बजाती !! 🥁⚔️

सुबह-सुबह चाय पिलाती ☕, नाश्ता कराती 🍞
पर शाम होते-होते एक syringe खून जलाती! 💉🔥
समझ नहीं पाता, किस बात का रहता रोष है 😤
बात-बेबात! अपने तानों से ठोकती रोज़ है! 🗯️

मैं (मेरामित्र) उससे विनती करता हूं... 🙇‍♂️

मैं अपट गंवार तुम्हारे उलाहनों का मारा, 😔
तुम्हारे सारे कष्टों का बहाना!
रोज़ तुम्हारी बातों पर अमल करने की कोशिश करता हूं 🏃‍♂️
अव्वल आना तो दूर, औंधे मुँह गिरता हूं! 🤦‍♂️

मैं मंदबुद्धि, तुम्हारे ज्ञान के क़ाबिल नहीं 🤷‍♂️
मुझे सिर्फ़ पति बनाना था, अपराधी नहीं! 🚫👮‍♂️
मुझ पर एक उपकार कर दो 🙏
सिर्फ़ रात को परतंत्र  🌞➡️🌙
और  दिन को स्वतंत्र कर दो!! 
⚠️ Warning! - After this, I have no idea about the whereabouts of that friend. 🤣🤣


Clarification!
मैंने अपनी पत्नी से कहा... 💖

कितना किस्मत वाला हूँ, जो मैंने तुमको पाया है 🙏✨
स्वभाव से मीठी, नाम से Sweetie 😍, चीनी को भी फीका कर डाला है 🍯
तुम्हारे सोलह सोमवारों का फल, जैसा ईश्वर ने मुझको दे डाला है 🕉️🌙
तुम सुंदर पार्वती-सी, मुझको शंकर-सा कर डाला है! 🕉️💑

कितना भाग्यवान हूँ, जो मैंने तुमको पाया है 🌸
36 के 36 गुण! तुम गुणों की खान हो 🌟
अपने पापा की परी 👸, घर की शान हो 🏡
सीता-सी निश्चल, सुंदरतम और प्रकृति का अभिमान हो 🌿🌺
ईश्वर से मिली मुझको, जैसे श्रीराम-सा एक वरदान हो! 🙌

कितना यशस्वी हूँ, जो मैंने तुमको पाया है 🌞
माँ अन्नपूर्णा जैसी तुम्हारी छाया है 🍲🙏
राधा रानी समान तुम्हारी सुंदर काया है 🌹🎶
समझ नहीं पाता—सच है या श्रीकृष्ण-रचित कोई माया है!! 🎻💫



Wife reaction 😄👩‍🦰
तारीफ़ इतनी सुन,
पत्नी मुस्कराई 😊
अंतर-तम से आह्लादित हो इठलाई 💃✨
जाने-अनजाने में किए मेरे तथाकथित अपराध भुलाई 🤭💞

स्वादिष्ट पकवानों से जिह्वा की पूजा कराई 
मधुर गीतों से मन भी बहलाई !! 
इसीलिए मैं कहता हूं सभी मित्रों से 
अपनी पत्नी की ज़रूर करो बड़ाई!!
_✍️ रचनाकार: मेरे मित्र ,  निमित्त: Amit Kumar Pandey
Copyright and all rights reserved by writer 

Wednesday, 20 August 2025

क्या है माया ?? कृष्ण !

          क्या है माया ? कृष्ण !

हे सखा! हे माधव! हे मुकुंद!
मुझ पर न हो तुम्हारी कृपा शिथिल-कुंद।
हे जनार्दन, हे सुदर्शनधारी, हे योगेश्वर!
मेरी एक संका दूर करो, हे मुरलीधर!!


क्या है यह जीवन? क्या सचमुच है सब माया?
भांति-भांति का रूप धरें सब, क्या झूठ है यह काया?


मायापति मुस्कुराए, अपने सखा के कंधे पर हाथ फिराया और कहा,
समय आने पर पहचान कराऊँगा,
अपने सखा को माया से परिचित करूँगा! 
 इस बात को गए हैं अनेक दिन बीत,
भूल ही गए महाराज सुदामा, पर न भूले द्वारकाधीश!

एक दोपहरी विहार उपरांत थक कर दोनों मित्र 
 जा पहुचें कृष्ण-सुदामा स्वच्छ गोमती तीर,
चलो मित्र ! कलकल जल में , कर ले थोड़ा स्नान 
और मिटा लें प्यास भी पी कर मीठा नीर !

दोनों मित्र लगे नहाने , माँ गोमती को प्रणाम कर।
तृप्त हो वासुदेव निकले सरिता में कुछ एक डुबकी लगा कर,
करने लगे द्वारकाधीश पीतांबर धारी वहीँ नदी के तीर! 
 पर अभी तक नहीं हुआ था सुदामा का थकान क्षीण! 

सुदामा ने निश्चिंत जान कर, लिया डुबकी एक और ! 
और उधर किया कृष्ण ने क्रीड़ा, घेर लिया माया घनघोर।

सहसा कलकल गोमती में उठा  ज्वार  कठोर , 
बह गए सुदामा न जाने किस ओर! 
 सब कुछ ही वो भूल गए, न रहा कुछ सुझ !
लगे हाथ-पैर मारने, हो कर किंकर्तव्यविमूढ़! 

अचानक अपने आप को पाया  किनारे पर एक ,
जहाँ  हथिनी एक खड़ी थी, लेकर माला भीड़ समेत! 
और लोग सज-धज कर टकटकी लगाए,आँक रहे थे अपनी किस्मत को। 
ग़ज़! ना जाने, वर ले राजा ! भाग्यशाली किस जन को!

हथिनी ने फूलों की माला सुदामा के गले में डाला 
लोग कर उठे जय-जयकार, धन्य है महाराज हमारा।
महाराज! सुदामा! सहसा ही सहमे,
पूछे बात क्या है? क्यों लगा रहे राजाओं जैसे जयकारे!
 
 इस अद्भुत देश के बारे में, तब लोगों ने वृत्तांत सुनाया !
निसंतान राजा के  स्वर्ग-गमन उपरांत , यैसे ही परम्परा पूर्वजों ने हैं निभाया! 

चुना जाता ईसी बिधि हमरा  भाग्य विधाता  संभ्रांत!
जिस पर  ये दिव्य -कुंजरी जताती विश्वास , वही सिंघासन करे आबाद!!
भाग्यवान-विप्र राजा बन, चला महल की ओर लिए सारे अधिकार ! 
पीछे सैनिक कर रहे थे महाराज की जय जयकार।

राज करते बीत गए, कुछ एक महीने चार ! 
विवाह प्रस्ताव पर ,अब राजा ने किया  विचार।
यज्ञ हुआ, पूजा हुई ,नृप ने खोल दिया खजाना !! 
ब्राह्मण , दरिद्र और प्रजा को रूठ ने का ना दिया कोई बहाना !! 

उत्सव हुआ महल में, जगह जगह लग गए मेले ! 
नए वस्त्र और सुंदर आभूषणों में राजा- रानी लग रहे थे खिले खिले! 
वेद मंत्र ,आशीर्वचन मध्य  हैं मोहक फूलों के गंध !
धूम-धाम से महाराज,प्रणय सूत्र में गए बंध  !

राजा-रानी की जय-जयकार से, आसमान हुआ गुंजायमान।
सभी चले अपने घर को लेकर हरि का नाम। 


 महाराज रानी को पाकर उल्लास में डूबे,
राज-काज और रानी में दिन बिताना लगे।
बने दो बच्चों के पिता जैसे दिन रहे थे बीत,
घर-संसार और राज-पाट में भूले सारे अतीत। 


 सुबह बिताता वंदना-पूजन में,
दोपहर देश कार्य में,
शाम बितता आखेट-प्रमोद में,
निशा रानी आगोश में।

 प्रजा खुशहाल, राजा निश्चिंत, 
समय बीत गए एक युग।
माया ने प्रभाव दिखाया, समय ना रहा अनुकूल 
रोग ग्रस्त हुई भार्या, कोई कुछ समझ नहीं पाया 
राज वैद्य  ने किये सारे उपाय, पर बचा न पाया!!

राजा हुए शोकाकुल! हाय यह कैसी विपदा आई!
क्रंदन करते राजा पर, पर एक और मुसीबत छाई।

गंभीर हुए दरबारी सब, तुरंत ही सभा बुलाई 
महाराज समक्ष जा कर, अपनी अटल परम्परा सुनाई 
रानी चिता में जीवित प्रवेश करना होता है  राजा को 
तभी मिलेगी मुक्ति हमारी रानी और आपकी भार्या को! 

 सुन कर ये कठोर धर्म,
 नृप का हृदय गया बैठ  ।
पत्नी खोने का दुख भूल,
 स्वयं में गया पैठ। 

 
बहुत मंत्रणा के बाद भी, पाकर न बचने का कोई उपाय,
राजा अंग रक्षकों को लिए नदी में  गए हैं डुबकी लगाए।

 नहाते समय भी रुक नहीं रहे थे, सोच-सोच कर आँसू।
होगा जलना जिंदा! ना जाने किस जन्म का पाप बोल कर इसको कोसू ! 

 रक्षा करो हे गोविंदा! अनायास मुख से निकला श्री कृष्ण का नाम ! 
लिया डुबकी एक और विप्र ने और कर गया नाम कमाल।
 डुबकी से निकले सुदामा जैसे हो कोई स्वप्न से जागे,
कहीं कोई और न था, अपनी मुरलीधर है पीताम्बर बंधे! 

 हाथ जोड़कर, आँखों में लिए श्रद्धा के जल,
विचार रहे थे विप्र, कौन से पुण्य का है ! यह सुदर्शन! यैसा फल ! 
 
एक डुबकी भर में लिया जी,  एक पूरा जीवन।
और श्री कृष्ण महिमा ने नष्ट कर दिया संकायों का वन!

होकर प्रस्तुत लीलाधर के सामने, किया सखा को प्रणाम।
माया-रचनाकार ने भी किया अभिवादन स्वीकार,
लेकिन भाव थे उनके वैसे जैसे हों मित्र के मनःस्थिति से अंजान। 
और सुदामा लगा रहे थे अपने मन ही मन अनुमान!

 अनन्य भाव से कृष्ण की ओर निहार कर,
जिक्र किया घटना का, पूछ लिया योगेश्वर से,
क्या नहीं जानते,क्या हुआ हमारे साथ ? 
सब कुछ तुम्हीं करते ! फिर कैसे बने रहते हो इतने भी नादान?

क्या है असली! क्या है नकली?
क्या है सच का जीवन??
जो अभी-अभी जीवन भोगा
 या जो अभी लिए प्रस्तुत सुदामा तन! 
 
बोले कृष्ण! विप्र के देख कर शंकाग्रस्त विचार। 
मुझ-अतिरिक्त सब है माया,
मैं ही असली, मैं ही जीवन।
मैं ही पलता सब और,
मुझ को ही सब में देखो, देखो मेरा ही सब विस्तार।
मुझ छोड़, बाकी सब नकली, मेरी माया है सबसे तगड़ी। 

संसारी और अज्ञानी की क्या करूँ मैं बात,
बड़े-बड़े ज्ञानी और तपस्वी, भ्रमित हो जाते क्षण भर में योगी।
योगमाया जब अपना खेल दिखाए, 
जन्म-जन्मांतर तक देहाभिमान से  छूट न पाए।
 
 एक मुझ ईश्वर का नाम सहारा,
ले कर पार करते  हैं! जो  है हारा।
मैं ही सच्चा, मैं ही ब्रह्म, सब जीव मेरे ही अंश।
मुझे पाकर और नहीं कहीं है जाना,मैं ही जीवन यज्ञ रूपी प्रसाद! 
मैं ही परम विश्रांति, मैं ही चिर शांति।
मैं ही परम गति, मैं ही परमानंद!

अपना संदेह मिटा कर 
प्रभु के चरणों में शिश झुका कर 
बोले ब्राह्मण महान!
 घट-घट वासी ओ अविनाशी !
अमित है तुम्हारा विस्तार !  अमेया हैं तुम्हारा श्री और कांति!
तुम ही सब में,  सब है तुम में ! दूर हुआ हमारी भ्रांति!!

- रचनाकार भगवान श्री कृष्ण 
- निमित्त- Amit kr Pandey 

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